"हम मरेंगे या जीतेंगे", कृषि कानूनों के मुद्दे पर किसान नेता - खडे बोल

Latest

HINDI NEWS | LATEST NEWS | BIG BREAKING NEWS |

शुक्रवार, 8 जनवरी 2021

"हम मरेंगे या जीतेंगे", कृषि कानूनों के मुद्दे पर किसान नेता

"हम मरेंगे या जीतेंगे", कृषि कानूनों के मुद्दे पर किसान नेता 



पिछले 44 दिनों से किसानों का लगातार कृषि कानूनों
(Farm Laws) के खिलाफ़ दिल्ली में प्रदर्शन जारी है । इन किसानों को ना ठंड की कोई परवाह है और ना ही कोई बारिश की । लगभग 60 से अधिक किसानों की ठंड, बारिश और इन कानूनों के असहमति के कारण आत्महत्या कर चुके है । इन सब हालातों के बावजूद, कोई भी मुष्किल किसानों को उनके मकसद से पिछे नही हटा रही है । ...............................

सरकार के साथ किसान नेताओं संग वार्ता में शामिल होने वाले किसान नेता बलवंत सिंह बहरामके ने कुछ ऐसा ही रुख जाहिर किया । बहरामके ने अपनी टेबल पर डायरी पर पंजाबी में लिख रख था कि हम मरेंगे या जीतेंगे । इस ए आप किसान नेताओं के इस आंदोलन और कानूनों के खिलाफ़ जो दृढता है, उसे साफ समझ सकते है । सरकार किसानों संग वार्ता के जरिए आंदोलन को लंबा खिंच कर किसानों के थकाने की सोंच रही है, लेकिन किसानों का हौसला भी कुछ कम नही है । रोज किसान आंदोलन से जुडते किसानों के जत्थे, इस आंदोलन में नईं रूह फूंक रहे है ।

केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की मंशा भी इन कानूनों को वापस लेने की नही दिखती । ऐसे दिख रहा है के केंद्र सरकार इन सब मुद्दों को लेकर टाल-मटोल का रवैया अपना रही है । किसानों की और कोई साफ सहानुभूति केंद्र सरकार की नही दिखती । 




शुक्रवार को 02:30 बजे किसानों की और केंद्र सरकार की बातचीत फिर शुरू हुई । यह आठवीं दौर की बातचीत में भी कोई ठोस कदम नरेन्द्र मोदी सरकार नही निकाल सकी । याने इन 44 दिनों से चल रहे आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार असफल हुई । शुक्रवार को हुई बैठक में 40 किसान नेताओं ने भाग लिया । केंद्र सरकार की तरफ से इस बातचीत में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा रेल एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्यमंत्री सोम प्रकाश बैठक में शामिल हुए ।

अब अगले दौर की बैठक केंद्र सरकार के साथ 15 जनवरी को होगी ।

कुछ समय पहले ही किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली थी और केंद्र को अपनी ताक़त दिखाई थी । किसान नेताओं ने तो इसे सिर्फ ट्रेलर बताया था । किसान नेताओं ने कहा है के अगर सरकार इन काले कृषि कानूनों को वापस नही लेती तो गणतंत्र दिवस ( Republic day) पर भव्य ट्रैक्टर मार्च का आयोजन किया है ।


केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है के कोई भी फैसला पुरे देश को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा । किसान नेताओं का साफ कहना है के जबतक केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार जबतक यह कृषि कानूनों को वापस नही लेती तबतक कोई भी घर नही जाएगा ।

भारतीय किसान युनियन (BKU Rajjewal) गुट के नेता बलबीर सिंह रजवाल ने तीनों नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) को रद्द करने की मांग की है । उन्होंने कहा के सरकार इस तरह से कृषि के क्षेत्र में दखल नही दे सकती ।

प्रमुख विपक्षी दलों का कहना है के इस प्रदर्शन में मरने वाले किसानों के लिए सरकार के पास कोई सहानुभूति नही है । किसानों की बात मानकर यह कानूनों को रद्द करना चाहिए ।

आप की राय किसानों के आंदोलन को लेकर क्या है, यह हमे कमेन्ट कर जरूर बताए । अगर आपको आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करे । 

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

धन्यवाद् आपकी राय महत्वपूर्ण है ।