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सोमवार, 3 अगस्त 2020

नई शिक्षा निती एक तरह की तालाबंदी : काँग्रेस

नई शिक्षा निती एक तरह की तालाबंदी : काँग्रेस 

          Photo credit  : Business standard 

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कुछ दिन पहले देश के सामने नईं राष्ट्रीय शिक्षा निती 2020 पेश की । इस नए शिक्षा निति का विरोध लगातार बढ़ रहा है । अनेक शिक्षा विशेषज्ञों ने इस शिक्षा निति का प्रखर विरोध किया । अब इस नए शिक्षा निति की भारतीय काँग्रेस के तरफ से रविवार शाम को प्रेस कांफ्रेंस के जरिए आलोचना की गई । काँग्रेस की तरफ से इस प्रेस कांफ्रेंस में रणदिप सुरजेवाला ने काँग्रेस की बात रखी । 




काँग्रेस की तरफ उठाए गए कुछ मुद्दे :

विद्यार्थीयों के नुमाइंदे और पुर्व विद्यार्थीयों के नुमाइंदे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने जाकर विश्वविद्यालयों के
एकेडमिक कौन्सिल, इग्ज़ेक्यटिव़्‌ ( executive )
कौन्सिल मे बैठकर पाठ्यक्रम का निर्णय करते है, पढाई के तौर-तरीकों का निर्णय करते है, साथ ही पढाई के गतिविधियों के प्रसार-प्रचार का निर्णय करते है, 70 साल से चली आ रही इस प्रजातांत्रिक प्रक्रिया को बदलकर तालाबंदी करने का काम केंद्र सरकार ने किया गया है ।

काँग्रेस की और से कहा गया के केंद्र सरकार ने इस नए शिक्षा निति के जरिए प्राइवेटाइजेशन आॅफ एजुकेशन को बढ़ावा दे रही है । इससे गरिब और अमिर के बच्चों को समांतर शिक्षा देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित करना चाहती है, ऐसे आरोप केंद्र सरकार पर लगाए है ।

इस प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया के दिल्ली से मनोनीत लोग बोर्ड आॅफ गवर्नेंस के जरिए कॉलेज और युनिवर्सिटी को चलाएंगे । विश्वविद्यालय और कालेज के क्रिटिकल विचार को इस नए शिक्षा निति के जरिए खत्म किया जाएगा, बोर्ड आॅफ गवर्नेंस के जरिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार काॅलेज और युनिवर्सिटीज का केंद्रीकरण करने का प्रयास कर रही है । अपने ही विचारों के लोगों को इस बोर्ड आॅफ गवर्नेंस मे बिठाकर पाठ्यक्रम से लेकर अनेक चीजों पर अपना नियंत्रण रखना चाहती है । शिक्षकों से लेकर विद्यार्थियों तक क्या बोलना चाहिए और किसे निकालना चाहिए यह केंद्र अपने नियंत्रण मे लाने का प्रयास कर रही है । जब पुरे शिक्षा संस्थान बंद तब इसे इतने जल्दी लाने की जरूरत क्या थी और इसपर व्यापक तौर पर विचार-विमर्श क्यों न किया    गया ।




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